‘एक पेड़ माँ के नाम’ के तहत सात राष्ट्रमंडल खेल 2026 के पैरा पदक विजेताओं के सम्मान में 700 पेड़ लगाए गए; पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के सम्मान में अतिरिक्त 1,000 पेड़ समर्पित
गुरुग्राम। एम3एम फाउंडेशन ने अपने जारी ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत गुरुग्राम में 1,700 पेड़ों का पौधरोपण पूरा किया है, जो भारत की पैरा खेल उपलब्धियों को एक स्थायी पर्यावरणीय विरासत में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इनमें से 700 पेड़ राष्ट्रमंडल खेल 2026 के सात पैरा पदक विजेताओं के सम्मान में लगाए गए हैं, जिनमें प्रत्येक खिलाड़ी के नाम पर 100 पेड़ लगाए गए हैं, जबकि 1,000 अतिरिक्त पेड़ पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) के सम्मान में लगाए गए हैं।
यह विशेष सम्मान एम3एम फाउंडेशन के इस मानसून में गुरुग्राम और ताऊरू ब्लॉक की 11 पंचायतों में 1 लाख से अधिक पेड़ लगाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। इस समुदाय-आधारित अभियान के माध्यम से फाउंडेशन का उद्देश्य हरित आवरण को मजबूत करने के साथ-साथ ‘एक पेड़ माँ के नाम’ के संदेश को गाँवों, स्कूलों और स्थानीय समुदायों तक पहुँचाना है तथा एक हरित और टिकाऊ भविष्य के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देना है।

यह पहल डॉ. पायल कनोडिया, चेयरपर्सन, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया तथा चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी, एम3एम फाउंडेशन के उस विजन को दर्शाती है, जिसके तहत पैरा खेलों की उपलब्धियों को पोडियम से आगे ले जाकर समुदायों में सार्थक प्रभाव पैदा किया जाए। खेल उत्कृष्टता को पर्यावरणीय कार्रवाई से जोड़ते हुए, यह पहल राष्ट्रीय गौरव के क्षणों को ऐसी विरासत में बदलने का प्रयास है, जो लगातार आगे बढ़ती रहे।
इस पहल के तहत सम्मानित सात खिलाड़ी हैं—शर्मिला धनकर, शिल्पा शायला, झंडू कुमार, सोमन राणा, शुभम जुयाल, दिलीप मनाडु गावित और मोहम्मद बासिल। इन खिलाड़ियों के सम्मान में क्रमशः कादरपुर, उल्लावास, घाटा, शिखोपुर, रामगढ़, झुंड सराय और बजघेरा में 100-100 पेड़ लगाए गए हैं। शर्मिला धनकर ने महिला शॉट पुट F57 में स्वर्ण पदक, शिल्पा शायला ने महिला शॉट पुट F57 में कांस्य पदक, झंडू कुमार ने पैरा पावरलिफ्टिंग में कांस्य पदक, सोमन राणा ने पुरुष F57 शॉट पुट में स्वर्ण पदक, शुभम जुयाल ने पुरुष F57 शॉट पुट में रजत पदक, दिलीप मनाडु गावित ने पुरुष 100 मीटर T47 में स्वर्ण पदक और मोहम्मद बासिल ने पुरुष 100 मीटर T47 में रजत पदक हासिल किया।
इस पौधरोपण अभियान में सरपंचों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सरकारी अधिकारियों, सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थियों और शिक्षकों, गौशाला के पंडितों, जमीनी स्तर के खिलाड़ियों तथा समुदाय के सदस्यों ने भाग लिया। उनकी सामूहिक भागीदारी ने इस अभियान को भारत के पैरा चैंपियनों के सम्मान के सामूहिक उत्सव में बदल दिया और पर्यावरण के प्रति साझा जिम्मेदारी की भावना को मजबूत किया।
डॉ. पायल कनोडिया, चेयरपर्सन, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया तथा चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी, एम3एम फाउंडेशन ने कहा, “हमारे पैरा खिलाड़ियों ने देश को दिखाया है कि दृढ़ संकल्प बाधाओं को पार कर असाधारण संभावनाओं को जन्म दे सकता है। राष्ट्रमंडल खेलों में उनकी उपलब्धियाँ देश के लिए गर्व के क्षण हैं, लेकिन उनकी यात्राएँ खेल से कहीं आगे तक एक प्रेरक संदेश देती हैं। “मेरा विजन यह सुनिश्चित करना है कि हमारे पैरा खिलाड़ियों की उपलब्धियाँ समाज में अधिक समावेशन, भागीदारी और संभावनाओं को प्रेरित करें। हमारे सात पदक विजेताओं में से प्रत्येक के सम्मान में 100 पेड़ और PCI के सम्मान में 1,000 पेड़ लगाकर, हम उनकी कहानियों को पोडियम से आगे ले जा रहे हैं और समुदायों के बीच एक जीवंत विरासत का निर्माण कर रहे हैं।

“जैसे-जैसे भारत विकसित भारत 2047 की ओर बढ़ रहा है, प्रगति समावेशी और टिकाऊ होनी चाहिए। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ हमें उस विजन को कार्यरूप देने का अवसर देता है—उन लोगों का सम्मान करते हुए जो राष्ट्र को प्रेरित करते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए कुछ सार्थक तैयार करते हुए।”
भारत की स्वतंत्रता की शताब्दी की ओर बढ़ते हुए, राष्ट्र निर्माण उस विरासत के बारे में भी है जो हम पीछे छोड़ते हैं। ये 1,700 पेड़ खेल उत्कृष्टता, समावेशन, सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरणीय जिम्मेदारी को एक साथ लाते हैं—आज के भारत का सम्मान करते हुए उस भारत के निर्माण में योगदान देते हैं, जिसकी हम 2047 तक कल्पना करते हैं।
एम3एम फाउंडेशन इस विजन को आगे बढ़ाते हुए ऐसी पहलों का विस्तार करता रहेगा, जो खेल, समावेशन, पर्यावरणीय कार्रवाई और सामुदायिक विकास को एक साथ जोड़ती हैं, ताकि उपलब्धियाँ जमीनी स्तर पर सार्थक कार्रवाई के लिए प्रेरणा बनती रहें।
क्योंकि पदक एक पल का उत्सव होता है, लेकिन पेड़ उस विरासत को बढ़ते रहने का अवसर देता है।
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