नई दिल्ली। भारतभर के पारंपरिक बुनकरों और कारीगरों से सीधे सीखने से लेकर उन अनुभवों को समकालीन फैशन में रूपांतरित करने तक, M3M Foundation की ‘Threads of India – भारत का ताना-बाना’ पहल ने नई दिल्ली के रोज़िएट हाउस में आयोजित विशेष ‘Evening of Patronage & Purpose’ में शिल्प, संस्कृति, स्थिरता और महिला सशक्तीकरण को एक मंच पर प्रस्तुत किया। इस पहल के केंद्र में M3M Foundation की iMpower Academy for Skills की चार युवा महिला कारीगरों द्वारा तैयार की गई 32 अनूठी पोशाकें रहीं। ‘Ada-e-Hind’ नामक यह संग्रह एक ऐसी यात्रा को दर्शाता है, जिसने इन युवा कारीगरों को कक्षा से आगे ले जाकर भारत की समृद्ध वस्त्र परंपराओं के केंद्र तक पहुँचाया। इस अवसर पर दिल्ली के फैशन और सामाजिक क्षेत्र की जानी-मानी हस्तियों की उपस्थिति रही, जिनमें रमौला बच्चन, रीना ढाका, सुनीत वर्मा, सोनल मानसिंह सहित कई प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनर, कॉर्पोरेट लीडर और दिल्ली की पेज-3 हस्तियाँ शामिल थीं।
इस अवसर पर M3M Foundation की चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी, डॉ. पायल बंसल कनोडिया ने कहा, “Threads of India मूल रूप से खोज, सीखने और अवसर की एक यात्रा है। हम चाहते थे कि हमारी युवा कारीगर भारत की समृद्ध शिल्प परंपराओं को केवल कक्षा के माध्यम से न समझें, बल्कि उन लोगों से मिलें, जिन्होंने पीढ़ियों से इन परंपराओं को संरक्षित किया है, और उनके पीछे छिपे ज्ञान, कौशल और कहानियों को समझें। उस अनुभव से उन्होंने जो सृजन किया है, वह हमारी विरासत का एक सुंदर प्रतिबिंब है, जिसे उन्होंने अपनी कल्पना और समकालीन संवेदनशीलता के माध्यम से एक नया रूप दिया है। हमारे लिए स्थिरता केवल हम जो बनाते हैं, उससे आगे की बात है; यह उन कौशलों, आजीविकाओं और समुदायों को बनाए रखने के बारे में भी है, जो भारत की असाधारण शिल्प परंपराओं को जीवित रखते हैं और उन्हें आगे बढ़ाते हैं।”

‘Threads of India 1.0’ पहल के तहत कारीगरों ने देश के विभिन्न क्षेत्रों की यात्रा की, स्थानीय बुनकरों और कारीगरों से मुलाकात की तथा भारत की विविध वस्त्र विरासत को आकार देने वाली तकनीकों, सामग्रियों, डिजाइनों और सांस्कृतिक कथाओं को प्रत्यक्ष रूप से समझा। पारंपरिक प्रथाओं से प्राप्त यह अनुभव 32 समकालीन रचनाओं के विकास का आधार बना, जिसमें पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक डिजाइन संवेदनाओं का समन्वय किया गया। ‘Dream Weavers 1.0’ की सफलता के बाद इस संग्रह को पहली बार इस वर्ष Times Fashion Week 2026 में प्रदर्शित किया गया। 32 में से प्रत्येक पोशाक को विशिष्ट रूप से तैयार किया गया है और किसी भी पोशाक की प्रतिकृति नहीं बनाई गई, जो भारतभर की कारीगरों की यात्रा से प्राप्त सीख और उनकी रचनात्मक व्याख्या को दर्शाती है।
‘Threads of India’, M3M Foundation की iMpower Academy for Skills के माध्यम से किए जा रहे कार्यों का विस्तार है। अकादमी ने अब तक 12,000 से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित किया है, जिनमें से 76% से अधिक युवाओं को रोजगार प्राप्त हुआ है। इनमें फैशन, सिलाई और टेलरिंग के क्षेत्र में प्रशिक्षित 2,000 से अधिक युवा भी शामिल हैं। यह पहल दर्शाती है कि कौशल विकास केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं को अनुभव, रचनात्मक अभिव्यक्ति और टिकाऊ आजीविका की दिशा में अवसर प्रदान कर सकता है। इस पहल के पीछे व्यापक दृष्टिकोण शिल्प संरक्षण और समकालीन अवसरों के बीच एक सार्थक संबंध स्थापित करना है। युवा महिलाओं को पारंपरिक कारीगरों से सीधे सीखने और उस ज्ञान को अपने कार्य के माध्यम से नए रूप में प्रस्तुत करने में सक्षम बनाकर, यह पहल न केवल भारत की शिल्प परंपराओं की निरंतरता में योगदान देने का प्रयास करती है, बल्कि अगली पीढ़ी के कुशल कारीगरों के आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में भी काम करती है।

सितंबर की 26 तारीख को आयोजित इस विशेष संध्या के साथ यह यात्रा अपने समापन तक पहुँची। 32 पोशाकों को एक विशेष नीलामी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसमें अतिथियों को इन रचनाओं और इनके पीछे जुड़े व्यापक उद्देश्य का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया गया। Pearl Academy के विद्यार्थियों ने स्वेच्छा से इस उत्कृष्ट परिधान संग्रह को मैनिकिन पर प्रदर्शित करने के लिए ड्रेप किया और प्रत्येक परिधान को उपयुक्त एक्सेसरीज़ के साथ सजाया, जिससे उन्हें नीलामी के लिए तैयार किया जा सके। इस आयोजन में संरक्षण एवं सहयोग को टिकाऊ शिल्प को प्रोत्साहित करने के माध्यम के रूप में प्रस्तुत किया गया, साथ ही प्रत्येक रचना में लगे कौशल और प्रयास को भी सम्मान दिया गया।
इस अवसर का एक प्रमुख आकर्षण ‘Threads of India’ कॉफी टेबल बुक का लॉन्च रहा, जिसमें सभी 32 रचनाओं और उनके पीछे की पूरी यात्रा को दर्ज किया गया है। इस पुस्तक में M3M Foundation की चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी, डॉ. पायल बंसल कनोडिया के साथ चारों युवा कारीगरों को भी प्रमुखता से शामिल किया गया, जिससे इस कहानी के केंद्र में रचनाकारों को रखा गया। इस अवसर पर ‘Threads of India’ के आधिकारिक गीत का भी लॉन्च किया गया, जिसने भारत की वस्त्र विरासत और इसके युवा संरक्षकों के उत्सव में एक और कलात्मक अभिव्यक्ति जोड़ी।
पहल के प्रति व्यक्तिगत समर्थन के रूप में डॉ. पायल बंसल कनोडिया ने इस संग्रह की एक पोशाक स्वयं पहनी। उनकी यह सहभागिता उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत ‘Threads of India’ की परिकल्पना की गई थी—ऐसे मंच तैयार करना, जहाँ युवा महिलाएँ अपने कौशल को प्रदर्शित कर सकें और फैशन के प्रति अधिक जागरूक एवं टिकाऊ दृष्टिकोण को प्रोत्साहित किया जा सके। इस अवसर पर चारों युवा कारीगरों को भी उनके योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके कौशल प्रशिक्षण से लेकर राष्ट्रीय फैशन मंच पर प्रस्तुत किए गए संग्रह के निर्माण तक की यात्रा की सराहना के रूप में दिया गया।
‘Threads of India – भारत का ताना-बाना’ के माध्यम से M3M Foundation भारत की जीवंत शिल्प परंपराओं और युवा पीढ़ी की आकांक्षाओं के बीच एक सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है—जहाँ पारंपरिक ज्ञान सीखने का स्रोत बने, कौशल आजीविका का माध्यम बने और फैशन उद्देश्यपूर्ण अभिव्यक्ति का मंच बने।
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