गुरुग्राम। जैसे-जैसे भारत जागरूकता और प्रारंभिक हस्तक्षेप के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के अपने प्रयासों को तेज कर रहा है, वैसे-वैसे जागरूक समुदायों का निर्माण एक राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में उभरकर सामने आया है।
इस दृष्टि को जमीनी स्तर पर समर्थन प्रदान करते हुए, एम3एम फाउंडेशन हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से नूंह जिले के तावड़ू ब्लॉक में 14 वर्षीय बालिकाओं के बीच सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम को बढ़ावा देने तथा एचपीवी टीकाकरण के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक एचपीवी जागरूकता अभियान चला रहा है।
स्वास्थ्य संचार के क्षेत्र में एक अग्रणी दृष्टिकोण अपनाते हुए, एम3एम फाउंडेशन हरियाणा के उन शुरुआती सीएसआर संगठनों में शामिल है, जिन्होंने SY Impact Consulting द्वारा विकसित विशेष एचपीवी जागरूकता हेतु सूचना, शिक्षा एवं संचार (IEC) सामग्री को अपनाया और जमीनी स्तर पर लागू किया। इन नवाचारपूर्ण साधनों में इंटरैक्टिव स्नेक एंड लैडर एवं लूडो गेम्स, फ्लिप बुक्स, क्विज़ कार्ड्स, एचपीवी जागरूकता गीत, सूचनात्मक रील्स तथा एआई-संचालित स्टोरीटेलिंग मॉड्यूल शामिल हैं, जिन्होंने निवारक स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी बातचीत को अधिक रोचक और सुलभ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
जो पहल एक जागरूकता अभियान के रूप में शुरू हुई थी, वह अब सार्थक परिणामों में परिवर्तित हो चुकी है। सतत जनसंपर्क और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से यह अभियान 600 से अधिक किशोरियों के टीकाकरण को सक्षम बना चुका है, जो इसके प्रारंभिक लक्ष्य से अधिक है।
तावड़ू ब्लॉक के 84 गांवों और 54 ग्राम पंचायतों—जिनमें एम.पी. अहीर, राठीवास, खोरी कलां, चरौरा, पड़हेनी, कलवाड़ी, जौरासी, शिकरपुर, रहेरी, चाहलका और जाफराबाद सहित कई अन्य गांव शामिल हैं—में संचालित इस पहल के तहत 90 से अधिक जागरूकता सत्र आयोजित किए गए हैं और 60 से अधिक सरकारी विद्यालयों तक पहुंच बनाई गई है। इस अभियान के माध्यम से स्कूली बच्चों, माताओं, शिक्षकों, आशा कार्यकर्ताओं, स्वास्थ्य अधिकारियों और समुदाय के सदस्यों सहित 3,000 से अधिक हितधारकों को जोड़ा गया है।
इस पहल की शुरुआत में गलत सूचनाएं और सामाजिक भ्रांतियां बड़ी चुनौतियों के रूप में सामने आईं। बांझपन की आशंकाएं, दुष्प्रभावों का भय, सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी और धार्मिक भ्रांतियां अक्सर एचपीवी टीकाकरण को लेकर समुदाय की सोच को प्रभावित करती थीं।
हालांकि, निरंतर संवाद और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से परिवारों के बीच धीरे-धीरे विश्वास स्थापित हुआ। जहां कुछ लोग अब भी हिचकिचा रहे थे, वहीं कई परिवारों ने सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर टीकाकरण के महत्व को समझते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया दी।
सीएचसी तावड़ू, हरियाणा के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. निहाल सिंह सोलंकी ने कहा, “सामुदायिक जागरूकता निवारक स्वास्थ्य पहलों की सफलता की कुंजी है। एम3एम फाउंडेशन के साथ हमारे सहयोग ने एचपीवी टीकाकरण के प्रति स्वीकार्यता बढ़ाने और जमीनी स्तर पर परिवारों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने में सहायता की है।”
अपना अनुभव साझा करते हुए एक लाभार्थी ने कहा, “शुरुआत में लोगों और सोशल मीडिया से अलग-अलग बातें सुनकर हमारे मन में कई शंकाएं थीं। लेकिन जागरूकता सत्र में भाग लेने के बाद हमें समझ आया कि यह टीका क्यों महत्वपूर्ण है। टीकाकरण के बाद मैं अधिक आत्मविश्वास महसूस करती हूं और अब अन्य लड़कियों को भी इसके बारे में जानने और अपने स्वास्थ्य के लिए सही निर्णय लेने के लिए प्रेरित करती हूं।”
ये अनुभव समुदायों में हो रहे एक बड़े सकारात्मक बदलाव को दर्शाते हैं, जहां जागरूकता और संवाद परिवारों को डर और भ्रांतियों से आगे बढ़कर अपनी बेटियों के स्वास्थ्य के लिए सूचित निर्णय लेने में सक्षम बना रहे हैं।
इस पहल पर अपने विचार साझा करते हुए एम3एम फाउंडेशन की चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी डॉ. पायल कनोड़िया ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निवारक स्वास्थ्य सेवाओं और स्वस्थ भारत के दृष्टिकोण से प्रेरित होकर, हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि वंचित समुदायों की बालिकाओं को सही जानकारी और समय पर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच प्राप्त हो। जागरूकता में समुदायों को बदलने और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित करने की शक्ति है।”
हरियाणा स्वास्थ्य विभाग के साथ अपने निरंतर सहयोग के माध्यम से, एम3एम फाउंडेशन सामुदायिक स्वास्थ्य तंत्र को सुदृढ़ करने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि जागरूकता वास्तविक कार्रवाई में परिवर्तित हो, जिससे वंचित समुदायों की बालिकाओं के स्वास्थ्य और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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