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Raksha Bandhan 2025: 95 साल बाद दुर्लभ महासंयोग, जानें क्यों है खास यह पर्व

सौभाग्य और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ 9 अगस्त को मनाएं भाई-बहन का पवित्र पर्व

India CSR by India CSR
August 7, 2025
in Festivals
Reading Time: 5 mins read
Raksha Bandhan 2025: 95 साल बाद दुर्लभ महासंयोग, जानें क्यों है खास यह पर्व

Raksha Bandhan 2025: 95 साल बाद दुर्लभ महासंयोग, जानें क्यों है खास यह पर्व

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Raksha Bandhan 2025: रक्षाबंधन, भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का पवित्र पर्व, इस साल 9 अगस्त 2025 को असाधारण रूप से खास होने जा रहा है। श्रावण शुक्ल पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह त्योहार इस बार 95 साल बाद एक दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग के साथ आ रहा है, जो इसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से विशेष बनाता है। सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, और श्रवण नक्षत्र का संयोग इस दिन को समृद्धि, सुख, और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक बनाता है। इसके अलावा, इस बार भद्रा का साया भी नहीं रहेगा, जिससे राखी बांधने का समय और भी शुभ हो गया है। यह लेख रक्षाबंधन 2025 के इस अनूठे संयोग, शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, और सांस्कृतिक महत्व को विस्तार से बताता है, जिसमें नवीनतम ज्योतिषीय जानकारी और विशेषज्ञों के विचार शामिल हैं।

रक्षाबंधन का सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व

रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के अटूट बंधन का प्रतीक है, जो प्रेम, विश्वास, और रक्षा के वचन को दर्शाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब श्रीकृष्ण की उंगली शस्त्र से कट गई थी, तब द्रौपदी ने अपने आंचल का टुकड़ा बांधकर उनकी रक्षा की थी। बदले में, श्रीकृष्ण ने चीरहरण के समय द्रौपदी की लज्जा की रक्षा की। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, यह घटना रक्षासूत्र की परंपरा की शुरुआत मानी जाती है। प्राचीन काल में ब्राह्मण अपने यजमानों को रक्षासूत्र बांधकर उनकी मंगलकामना करते थे, और यजुर्वेद का पाठ शुरू करने के लिए यह दिन शुभ माना जाता था।

आज यह पर्व भारत के साथ-साथ नेपाल, मॉरीशस, फिजी, और विश्व भर में बसे भारतीय समुदायों में धूमधाम से मनाया जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के एक लेख में उल्लेख किया गया कि रक्षाबंधन सामाजिक एकता को बढ़ावा देता है, जहां विभिन्न समुदाय एक-दूसरे को राखी बांधकर प्रेम और विश्वास का संदेश देते हैं। X पर ट्रेंडिंग पोस्ट्स में लोग राखी की तैयारियों, जैसे घर में बनी साबूदाना बर्फी और अनोखी राखियों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जो इस पर्व की जीवंतता को दर्शाता है।

इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2025: माँ लक्ष्मी की कृपा चाहिए? तो थाली में ज़रूर रखें ये 3 शुभ चीजें!

95 साल बाद दुर्लभ महासंयोग

रक्षाबंधन 2025 को विशेष बनाने वाला प्रमुख कारण है 95 साल बाद बनने वाला दुर्लभ ज्योतिषीय संयोग। दैनिक जागरण के अनुसार, 1930 में 9 अगस्त को भी रक्षाबंधन शनिवार को मनाया गया था, जब पूर्णिमा तिथि, सौभाग्य योग, श्रवण नक्षत्र, और बव-बालव करण का संयोग बना था। इस बार भी लगभग समान स्थिति बन रही है, जिसमें केवल 5 मिनट का अंतर है। इस संयोग में सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, और श्रवण नक्षत्र का मेल इस पर्व को अत्यंत शुभ और फलदायी बनाता है।

  • सौभाग्य योग: यह योग समृद्धि, सौभाग्य, और अच्छे स्वास्थ्य का प्रतीक है। मनीकंट्रोल के अनुसार, इस योग में किए गए कार्य, विशेष रूप से राखी बांधना, परिवार और रिश्तों में सकारात्मक ऊर्जा लाते हैं।
  • सर्वार्थ सिद्धि योग: यह योग सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाला माना जाता है। सीएनबीसी टीवी18 के अनुसार, “सर्वार्थ” का अर्थ है “सभी उद्देश्य” और “सिद्धि” का अर्थ है “सफलता”। यह योग नए कार्य शुरू करने के लिए सर्वोत्तम है, क्योंकि यह बाधाओं को दूर करता है।
  • श्रवण नक्षत्र: यह नक्षत्र रिश्तों को पोषित करने, आस्था को गहरा करने, और आध्यात्मिक शक्ति बढ़ाने के लिए जाना जाता है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह संयोग 95 साल बाद दोहराया जा रहा है, जो इसे एक बार जीवन में आने वाला अवसर बनाता है।

आज तक ने बताया कि इस बार सूर्य-शनि से नवपंचम योग, मंगल-शनि से समसप्तक योग, और मंगल-राहु से षडाष्टक योग का निर्माण भी हो रहा है, जो कुछ राशियों के लिए विशेष रूप से शुभ है। यह संयोग रक्षाबंधन को न केवल आध्यात्मिक, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी ऐतिहासिक बनाता है।

Raksha Bandhan

रक्षाबंधन 2025: प्रमुख तथ्य तालिका

विषयविवरण
पर्व का नामरक्षाबंधन 2025
तिथि9 अगस्त 2025, शनिवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ8 अगस्त 2025, दोपहर 2:12 बजे
पूर्णिमा तिथि समाप्त9 अगस्त 2025, दोपहर 1:24 बजे
राखी बांधने का शुभ मुहूर्त9 अगस्त को सुबह 5:47 बजे से दोपहर 1:24 बजे तक
शुभ योगसौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र
भद्रा कालसमाप्त होगा 9 अगस्त को तड़के 1:52 बजे
विशेष ज्योतिषीय संयोग95 साल बाद दुर्लभ महासंयोग, भद्रा व पंचक का साया नहीं
पूजन के लिए वस्तुएंरोली, चंदन, अक्षत, दही, रक्षासूत्र, मिठाई, घी का दीपक
शुभ राशियांकर्क, सिंह, धनु

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त

रक्षाबंधन 2025 के लिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 9 अगस्त को सुबह 5 बजकर 47 मिनट से शुरू होगा और दोपहर 1 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इसकी अवधि 7 घंटे 37 मिनट की होगी, जो अपराह्न मुहूर्त के अंतर्गत आता है। सीएनबीसी टीवी18 के अनुसार, यह समय राखी बांधने के लिए सबसे उपयुक्त है, क्योंकि यह भद्रा काल के बाद शुरू होता है। इसके अतिरिक्त, अन्य शुभ मुहूर्त निम्नलिखित हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:22 से 5:02 तक, जो पूजा और ध्यान के लिए आदर्श है।
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:17 से 12:53 तक, जो सभी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त है।
  • सौभाग्य मुहूर्त: सुबह 4:08 से 10 अगस्त तड़के 2:15 तक, जो परिवार की समृद्धि के लिए लाभकारी है।

भद्रा का साया नहीं: एक विशेष संयोग

भद्रा काल, जो हिंदू शास्त्रों में अशुभ माना जाता है, इस बार रक्षाबंधन को प्रभावित नहीं करेगा। पत्रिका के अनुसार, भद्रा 8 अगस्त को दोपहर 2:12 से शुरू होगी और 9 अगस्त को तड़के 1:52 पर समाप्त हो जाएगी। इसके बाद राखी बांधने का शुभ समय शुरू होगा। आज तक ने बताया कि 100 साल बाद इस बार न तो भद्रा और न ही पंचक का साया रहेगा, जो इस पर्व को और भी मंगलकारी बनाता है। यह संयोग राखी बांधने के लिए निर्बाध और शुभ समय प्रदान करता है।

रक्षाबंधन की तिथि और पंचांग

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पूर्णिमा तिथि 8 अगस्त 2025 को दोपहर 2:12 से शुरू होगी और 9 अगस्त को दोपहर 1:24 पर समाप्त होगी। उदयातिथि के आधार पर, रक्षाबंधन 9 अगस्त, शनिवार को मनाया जाएगा। जागरण के अनुसार, यह तिथि सावन मास की अंतिम पूर्णिमा के साथ संयुक्त होने के कारण विशेष महत्व रखती है। इस दिन वेदपाठी ब्राह्मण यजुर्वेद का पाठ शुरू करते हैं, और शिक्षा या नए कार्यों की शुरुआत के लिए यह समय शुभ माना जाता है।

रक्षाबंधन की पूजन विधि

रक्षाबंधन की पूजा एक भावनात्मक और पवित्र अनुष्ठान है, जो भाई-बहन के बंधन को मजबूत करता है। न्यूज18 के आचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, पूजा की विधि इस प्रकार है:

  1. पूजा की तैयारी: बहनें एक थाली में रोली, चंदन, अक्षत, दही, रक्षासूत्र, मिठाई, और घी का दीपक सजाएं।
  2. भगवान को अर्पण: रक्षासूत्र और पूजा की थाली को भगवान गणेश, माता लक्ष्मी, या कुलदेवता को समर्पित करें।
  3. भाई की पूजा: भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। उनकी दाहिनी कलाई पर तिलक लगाएं, रक्षासूत्र बांधें (तीन गांठों के साथ, जो त्रिदेवों का प्रतीक हैं), और आरती करें।
  4. मंगलकामना: भाई को मिठाई खिलाएं और उनके दीर्घायु, सुख, और समृद्धि की प्रार्थना करें।
  5. आशीर्वाद और उपहार: राखी बंधवाने के बाद भाई-बहन माता-पिता और गुरु का आशीर्वाद लें। भाई अपनी सामर्थ्य के अनुसार बहन को उपहार दें, जैसे गहने, कपड़े, या डिजिटल गैजेट्स।

अमर उजाला के अनुसार, पूजा के दौरान भाई और बहन का सिर ढका होना चाहिए, और काले वस्त्र या तीखा भोजन देने से बचना चाहिए। घर में बनी मिठाइयां, जैसे साबूदाना बर्फी, इस अवसर पर विशेष रूप से शुभ मानी जाती हैं।

इसे भी पढ़ें: Raksha Bandhan 2025: 8 या 9 अगस्त कब है, जानें राखी बांधने का शुभ मुहूर्त और विधि

रक्षासूत्र का स्वरूप और महत्व

रक्षासूत्र रक्षाबंधन का हृदय है, जो भाई की रक्षा और दीर्घायु का प्रतीक है। न्यूज18 के अनुसार, रक्षासूत्र में तीन धागे—लाल, पीला, और सफेद—होने चाहिए, जिसमें लाल और पीला धागा अनिवार्य है। चंदन से सजा रक्षासूत्र विशेष रूप से शुभ माना जाता है। यदि विशेष राखी उपलब्ध न हो, तो साधारण कलावा भी श्रद्धा के साथ बांधा जा सकता है। हाल ही में साध्वी प्राची ने चांद-सितारे वाली राखियों पर आपत्ति जताई थी, लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि राखी का भाव और श्रद्धा ही सर्वोपरि है।

कुछ राशियों के लिए विशेष शुभ प्रभाव

आज तक के ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर बनने वाले सौभाग्य योग, शोभन योग, और सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष प्रभाव कर्क, सिंह, और धनु राशियों पर पड़ेगा। इन राशियों के जातकों को पारिवारिक रिश्तों में मजबूती, करियर में उन्नति, और आर्थिक लाभ की संभावना है। टीवी9 ने बताया कि शनि-मंगल के संयोग से बनने वाला नवपंचम राजयोग भी कुछ राशियों के लिए समृद्धि और सुख-सुविधाओं की वर्षा लाएगा।

रक्षाबंधन का आधुनिक और वैश्विक स्वरूप

रक्षाबंधन का प्रभाव अब भारत तक सीमित नहीं है। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, यह पर्व नेपाल, मॉरीशस, फिजी, और विश्व के अन्य हिस्सों में बसे भारतीय समुदायों में उत्साह से मनाया जाता है। भारत में यह सामाजिक एकता का प्रतीक है, जहां पड़ोसी और दोस्त भी एक-दूसरे को राखी बांधते हैं। बैंकबazaar ने बताया कि मछुआरा समुदाय इस दिन नारियल पूर्णिमा के रूप में समुद्र देवता वरुण की पूजा करता है।

आधुनिक युग में राखी का स्वरूप भी बदल रहा है। लाइवमिंट के अनुसार, इस साल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर डिज़ाइनर राखियां, पर्यावरण-अनुकूल राखियां, और डिजिटल गिफ्ट्स की बिक्री में 30% की वृद्धि देखी गई है। X पर लोग रक्षाबंधन की तैयारियों, जैसे घर में बनी मिठाइयों और थीम-आधारित राखियों की तस्वीरें साझा कर रहे हैं, जो इस पर्व की लोकप्रियता को दर्शाता है।

एक ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर

रक्षाबंधन 2025, 9 अगस्त को 95 साल बाद बनने वाले दुर्लभ महासंयोग के साथ, भाई-बहन के प्रेम का एक ऐतिहासिक उत्सव होगा। सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, और श्रवण नक्षत्र का संयोग, साथ ही भद्रा और पंचक का अभाव, इस पर्व को आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से अद्वितीय बनाता है। सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 तक का शुभ मुहूर्त राखी बांधने के लिए सर्वोत्तम है। यह त्योहार न केवल पारिवारिक बंधनों को मजबूत करता है, बल्कि समाज में प्रेम, विश्वास, और एकता की भावना को बढ़ावा देता है। जैसे-जैसे परिवार इस पवित्र दिन की तैयारियों में जुट रहे हैं, रक्षाबंधन 2025 की कॉस्मिक ऊर्जा हर भारतीय के दिल को छू रही है।

FAQs (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल):

1. रक्षाबंधन 2025 कब मनाया जाएगा?

यह पर्व 9 अगस्त 2025, शनिवार को मनाया जाएगा।

2. राखी बांधने का शुभ समय क्या है?

सुबह 5:47 से दोपहर 1:24 तक राखी बांधने का शुभ मुहूर्त रहेगा।

3. रक्षाबंधन 2025 को क्या खास बनाता है?

95 साल बाद सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, और श्रवण नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।

4. क्या इस बार भद्रा काल रहेगा?

नहीं, इस बार भद्रा काल राखी बांधने से पहले समाप्त हो जाएगा।

5. रक्षाबंधन पर कौन-कौन से योग बन रहे हैं?

सौभाग्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग, श्रवण नक्षत्र और नवपंचम राजयोग।

6. रक्षाबंधन किन राशियों के लिए विशेष शुभ रहेगा?

कर्क, सिंह, और धनु राशियों के लिए यह पर्व विशेष रूप से शुभ रहेगा।

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