अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले M3M फाउंडेशन ने महिलाओं के कौशल, उद्यमिता और आजीविका के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई
वाराणसी। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की संसदीय क्षेत्र काशी (वाराणसी) से भारत की पारंपरिक कला और ग्रामीण महिलाओं की आजीविका को नई दिशा देने की एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई। M3M Foundation की चेयरपर्सन एवं ट्रस्टी डॉ. पायल कनोड़िया ने आज “Weaving Change – विरासत की बुनावट” अभियान का शुभारंभ किया।
यह पहल M3M Foundation के कौशल सम्बल कार्यक्रम के अंतर्गत शुरू की गई है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को पारंपरिक भारतीय कला और शिल्प से जोड़ते हुए उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
यह कार्यक्रम वाराणसी जनपद के आराजी लाइन ब्लॉक की बैरवन पंचायत स्थित महिला स्वरोजगार समिति कार्यालय में आयोजित किया गया, जहाँ आसपास के विभिन्न गांवों से आई 500 से अधिक महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इस अवसर पर M3M Foundation के मैनेजिंग ट्रस्टी डॉ. ऐश्वर्य महाजन, प्रवीण सिंह गौतम (भाजपा जिला महामंत्री), अरविंद सिंह (भाजपा उपाध्यक्ष), प्रशांत जी (विश्व हिंदू परिषद), वैशाली ताई जोशी और अनंत प्रभा जी (विश्व मांगल्य सभा) सहित कई सामाजिक और जनप्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम में वाराणसी ग्रामीण के एमएलसी श्री हंसराज विश्वकर्मा जी तथा जिला परिषद वाराणसी की अध्यक्ष श्रीमती पूनम मौर्य की उपस्थिति में डॉ. पायल कनोड़िया और महिला स्वरोजगार समिति की संस्थापक रेखा चौहान के बीच इस परियोजना के लिए एमओयू का आदान-प्रदान किया गया।

इस पहल के अंतर्गत आने वाले समय में 40,000 ग्रामीण महिलाओं को भारतीय पारंपरिक कला और शिल्प में प्रशिक्षण देकर उन्हें ग्रामीण उद्यमिता और बाज़ार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।
इस अवसर पर महिला स्वरोजगार समिति की संस्थापक रेखा चौहान ने कहा,
“वाराणसी और आसपास के गांवों की महिलाओं के पास पारंपरिक कौशल की समृद्ध विरासत है। M3M Foundation के सहयोग से यह पहल इन महिलाओं को प्रशिक्षण, बाज़ार और नए अवसर प्रदान करेगी, जिससे वे आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी।”
इस अवसर पर बोलते हुए एमएलसी श्री हंसराज विश्वकर्मा जी ने कहा,
“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में काशी आज विकास और विरासत के अद्भुत संगम के रूप में उभर रही है। M3M Foundation की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को कौशल और उद्यमिता से जोड़कर न केवल उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत करेगी, बल्कि काशी की समृद्ध कला और शिल्प परंपरा को भी नई पहचान देगी।”
अपने संबोधन में डॉ. पायल कनोड़िया ने कहा कि भारत की पारंपरिक कला और शिल्प को जीवित रखने में ग्रामीण महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
उन्होंने कहा,
“Weaving Change – विरासत की बुनावट केवल एक परियोजना नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं के कौशल को उद्यमिता से जोड़ते हुए भारत की विरासत को ‘रूरल टू ग्लोबल’ के रूप में दुनिया तक पहुँचाना है।”
डॉ. पायल कनोड़िया ने यह भी जानकारी दी कि इस नई पहल के साथ M3M Foundation वाराणसी में केवल आजीविका और महिला सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
उन्होंने बताया कि काशी के ऐतिहासिक दुर्गा घाट पर स्थित एकनाथ भवन के पुनर्विकास के अंतर्गत कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं। परिसर में स्थित विठ्ठल मंदिर के गर्भगृह और सभाकक्ष का पुनर्निर्माण किया गया है, वहीं नीचे की मंजिल पर अन्नक्षेत्र विकसित किया गया है और ऊपरी मंजिलों को यात्रियों एवं साधकों के लिए धर्मशाला के रूप में तैयार किया गया है।

इसके साथ ही सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के आयोजन हेतु एक सामुदायिक सभागार का निर्माण भी किया गया है, जिससे यह स्थान केवल पूजा का केंद्र ही नहीं बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने वाला एक जीवंत स्थल बन सके।
यह पहल स्थानीय पारंपरिक उत्पादों जैसे कथरी (अपसाइकल क्विल्ट क्राफ्ट), घास आधारित उत्पादों जैसे कुरुई तथा अन्य ग्रामीण हस्तशिल्प को आधुनिक डिजाइन, डिजिटल मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँचाने पर केंद्रित है।
यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “वोकल फॉर लोकल” और “विरासत से विकास” के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस अभियान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के कौशल को नई पहचान देने के साथ-साथ भारत की समृद्ध कला परंपरा को वैश्विक मंच तक पहुँचाने का प्रयास किया जाएगा।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित महिलाओं ने अपनी पारंपरिक कला और कौशल को नई पहचान देने और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प लिया।
(इंडिया सीएसआर)
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