पूरे घटनाक्रम में आतंकी हमले के पीछे की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी को लेकर सरकार की भूमिका पर नए सवाल खड़े किए।
नई दिल्ली (इंडिया सीएसआर)। जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने पहलगाम में हुए आतंकी हमले को सुरक्षा में हुई चूक करार देते हुए घटना के 82 दिनों बाद चुप्पी तोड़ते हुए उसकी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की है।
जम्मू-कश्मीर में पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की वरिष्ठ संपादक भारती जैन को दिए इंटरव्यू में कहा कि पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित था। इसका उद्देश्य देश में सांप्रदायिक तनाव फैलाना था। उल्लेखनीय है कि इन हमलों में शामिल आतंकवादी पकड़े नहीं गए हैं।
भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं वर्तमान में उप-राज्यपाल ने कहा, पहलगाम में जो हुआ वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण था; निर्दोष लोगों की बेरहमी से हत्या की गई। मैं इस घटना की पूरी जिम्मेदारी लेता हूँ, जो निस्संदेह एक सुरक्षा चूक थी। यहाँ आम धारणा रही है कि पर्यटकों को आतंकवादी निशाना नहीं बनाते। जिस स्थान पर हमला हुआ, वह एक खुला मैदान है। वहां सुरक्षा बलों की उपस्थिति के लिए कोई सुविधा या व्यवस्था नहीं थी।
मनोज सिन्हा का कहना है कि यह पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादी हमला था। इस मामले में एनआईए द्वारा की गई गिरफ्तारियों से स्थानीय संलिप्तता की पुष्टि होती है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह विफल हो चुकी है। यह हमला राष्ट्र की आत्मा पर एक गंभीर और जानबूझकर किया गया प्रहार था। पड़ोसी (पाकिस्तान) की मंशा थी कि एक सांप्रदायिक विभाजन पैदा किया जाए और देश के अन्य हिस्सों में रह रहे जम्मू-कश्मीर के लोगों के खिलाफ प्रतिक्रिया भड़काई जाए, जिससे अलगाव की भावना और गहरी हो।
सिन्हा ने कहा कि पाकिस्तान नहीं चाहता कि जम्मू-कश्मीर शांत और समृद्ध हो। पिछले पाँच वर्षों में, जम्मू-कश्मीर की अर्थव्यवस्था का आकार दोगुना हो गया है। पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। यह (हमला) पाकिस्तान द्वारा कश्मीर की आर्थिक समृद्धि को निशाना बनाने की एक कोशिश थी। लेकिन हमले के बाद कश्मीरी लोगों द्वारा किए गए विरोध और निंदा ने पाकिस्तान और आतंकी संगठनों को करारा जवाब दिया। ये स्पष्ट संकेत थे कि अब यहां आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में कोई हमला नहीं हुआ है। क्या यह स्थिति बनी रहेगी? इस प्रश्न के जवाब ने सिन्हा ने कहा – ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान के लिए स्पष्ट सीमाएँ तय कर दी हैं। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी आतंकी हमला युद्ध की तरह माना जाएगा। हमारी सेनाओं ने पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकानों पर सटीक हमले किए। जब पाकिस्तान ने हमारे सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो हमने उनके एयरबेस तबाह कर दिए। इसने पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया। फिर भी, एक ऐसा देश जिसने आतंकवाद को अपनी घोषित राज्य नीति बना लिया है, उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। मुझे विश्वास है कि गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और हमारी खुफिया एजेंसियाँ पाकिस्तान पर निगरानी रख रही हैं। लेकिन यह एक तथ्य है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जम्मू-कश्मीर में कोई आतंकी हमला नहीं हुआ है।
क्या पहलगाम हमले में स्थानीय संलिप्तता सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है? इसके जवाब में सिन्हा ने माना कि स्थानीय आतंकवाद में भर्ती अब ऐतिहासिक रूप से सबसे कम स्तर पर है। इस वर्ष अब तक केवल एक स्थानीय भर्ती हुई है, जबकि पिछले वर्ष 6 से 7 थीं; एक समय था जब यह संख्या 150 से 200 तक पहुँचती थी। लेकिन यह भी एक तथ्य है कि पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर दोनों क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आतंकवादियों की घुसपैठ को सुविधाजनक बनाया है।
22 अप्रैल 2025 को पहलगाम (जम्मू-कश्मीर) आतंकी हमले को लेकर केंद्र सरकार को लगातार तीखी आलोचनाओं का सामना करना पड़ रहा है। हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्री या प्रधानमंत्री की ओर से कोई सीधा बयान या प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं आई थी। अब तक न तो गृह मंत्रालय और न ही केंद्र सरकार की ओर से किसी प्रकार की ज़िम्मेदारीस्वीकार की थी। ऐसे माहौल में उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा का यह ताजा बयान, जिसमें उन्होंने हमले की नैतिक जिम्मेदारी स्वीकारी है, बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, इस बयान को लेकर राजनीतिक गलियारों में नई बहस भी छिड़ गई है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान दरअसल देश के गृह मंत्री अमित शाह को राजनीतिक और नैतिक दबाव से बचाने के लिए दिया गया है। उनका कहना था कि इस तरह की जिम्मेदारी का बोझ उप-राज्यपाल पर डालकर केंद्र सरकार खुद को सुरक्षित कर रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने आतंकी हमले के पीछे की जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था की नाकामी को लेकर सरकार की भूमिका पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
(टाइम्स आफ इंडिया में प्रकाशित साक्षात्कार के आधार पर, इंडिया सीएसआर)