छत्तीसगढ़ में जंगल की कटाई का मामला गंभीर होता जा रहा है। हजारों लोग रोजाना धरना देकर विरोध प्रकट कर रहे हैं। भविष्य में 3.99 लाख पेड़ और काटे जाने का खतरा बना हुआ है।
रायपुर (छत्तीसगढ़)। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार तहसील के मड़ागांव और सरईटोला गांवों में आदानी समूह द्वारा महाजनको (महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड) के लिए संचालित कोयला खनन परियोजना के तहत दो दिन में 10 हजार से अधिक पेड़ काट दिए गए। 26 और 27 जून 2025 को यह व्यापक वृक्ष कटाई गारे-पेलमा सेक्टर-2 कोल ब्लॉक में की गई, जहां कुल 214.869 हेक्टेयर वन भूमि को साफ किया जा रहा है। यह घटना पर्यावरणीय और सामाजिक स्तर पर गंभीर विवादों का कारण बन गई है।
परियोजना
यह परियोजना महाराष्ट्र के तीन प्रमुख ताप विद्युत संयंत्रों – चंद्रपुर (1,000 मेगावाट), कोराडी (1,980 मेगावाट) और परली (1,000 मेगावाट) को कोयला आपूर्ति के लिए 655.153 मिलियन मीट्रिक टन कोयला निकालने हेतु बनाई गई है। लगभग रुपये 7,642 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना में ओपन कास्ट और अंडरग्राउंड दोनों खनन विधियों का उपयोग किया जा रहा है। परियोजना से 14 गांव प्रभावित हो रहे हैं और लगभग 1,700 परिवारों को विस्थापन का सामना करना पड़ रहा है।
पर्यावरणीय प्रभाव
हसदेव अरण्य जैसे जैव विविधता समृद्ध वन क्षेत्र में की गई यह कटाई गंभीर पर्यावरणीय क्षति पहुंचा रही है। इस क्षेत्र को पहले “नो-गो ज़ोन” घोषित किया गया था, जहां खनन गतिविधियों की अनुमति नहीं थी। पेड़ों की कटाई से मानव-हाथी संघर्ष बढ़ रहा है और वन्यजीवों का निवास खतरे में पड़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, अब तक कुल 15,000 से अधिक पेड़ पहले ही काटे जा चुके हैं और भविष्य में 3.99 लाख पेड़ और काटे जाने का खतरा बना हुआ है।
सामाजिक प्रभाव
इस क्षेत्र के आदिवासी समुदायों का जीवन जंगल पर आधारित है। पेड़ों की कटाई ने उनके धार्मिक विश्वास, आजीविका और पारंपरिक जीवन शैली पर चोट पहुंचाई है। 26 जून को स्थानीय पुलिस ने कांग्रेस विधायक विद्यावती सीदार और सामाजिक कार्यकर्ता रिंचिन सहित सात लोगों को विरोध के दौरान हिरासत में ले लिया। लगभग 2,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती ने स्थानीय विरोध को और भी गहरा बना दिया है।
कानूनी विवाद और प्रक्रियागत अनियमितताएँ
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने 15 जनवरी 2024 को इस परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी को रद्द कर दिया था, लेकिन अगस्त 2023 में नई मंजूरी दे दी गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ग्राम सभाओं की फर्जी सहमति दिखाकर Forest Rights Act, 2006 का उल्लंघन किया गया। 2022 में घोषित लेमरु हाथी रिजर्व के बावजूद खनन गतिविधियाँ जारी हैं, जो सरकारी नियमों के पालन पर सवाल खड़ा करती हैं।
प्रमुख प्रतिक्रियाएँ
स्थानीय समुदाय और कार्यकर्ता
आम आदमी पार्टी रायगढ़, कांग्रेस, छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ताओं ने इसे कॉर्पोरेट हितों के लिए पर्यावरण और आदिवासी अधिकारों की अनदेखी बताया है।
आदानी समूह
आदानी समूह की वेबसाइट पर 10 करोड़ पेड़ लगाने की प्रतिबद्धता दिखाई गई है, लेकिन छत्तीसगढ़ में पेड़ कटाई पर कोई सीधा बयान नहीं दिया गया है।
सरकार और पर्यावरण संस्थाएं
आम आदमी पार्टी ने छत्तीसगढ़ सरकार पर आदानी समूह को फायदा पहुँचाने के आरोप लगाया है। केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने कभी इसे नो-गो ज़ोन माना था, लेकिन बाद में खनन की मंजूरी दी गई।
वर्तमान स्थिति
7 जुलाई 2025 तक पेड़ों की कटाई और खनन कार्य जारी हैं। विरोध और कानूनी लड़ाई अभी भी जारी है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट और NGT में लंबित मामले परियोजना के भविष्य को प्रभावित कर सकते हैं।
व्यापक संदर्भ
गारे-पेलमा सेक्टर-2 कोल माइन प्रकरण भारत में औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय संरक्षण के बीच टकराव का बड़ा उदाहरण है। हसदेव अरण्य जैसे समृद्ध वन क्षेत्र का विनाश, ऊर्जा ज़रूरतों के नाम पर किया जा रहा है, जिससे जैव विविधता, आदिवासी संस्कृति और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर गहरा असर पड़ रहा है।
छत्तीसगढ़ में आदानी महाजनको द्वारा की गई वृक्ष कटाई पर्यावरणीय और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करती है। ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कोशिश में हजारों पेड़ कट गए हैं, जिससे स्थानीय लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। अब आवश्यकता है पारदर्शी संवाद, जिम्मेदार खनन और संवेदनशील पर्यावरणीय नीति की, ताकि हसदेव अरण्य जैसे जीवनदायी वन सुरक्षित रह सकें।
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